आज भी याद है मुझको वो मुस्कुराता चेहरा…..

आज भी याद है मुझको वो मुस्कुराता चेहरा ,चमकता वो दुपट्टे में जैसे पहना हो चांद ने सेहरा |
छुप छुप के मुझसे यू मिलती थी वो नजरें जैसे बरसात में हो बादलों का पहरा |

होठों की सुरमई लाली सूरज से छीन लाई हो , आंखों में कजरे की कालिख जैसे अमावस छाई हो ।
मारे शर्म के वो गालों का सुर्ख हो जाना , आज भी याद है मुझको वो मुस्कुराता चेहरा ।

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