छम से बजती है कहीं पायल और उसकी यादों का आ जाना ।

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मौसम बरसात का है और बारिशों का तराना , छम से बजती है कहीं पायल और उसकी यादों का आ जाना ।

भीनी भीनी सी खुशबू थी मिट्टी की वो छत पर कागज़ की नाव चलाना , बादल का बारिश से जैसा वैसा था हम दोनों का याराना ।

ये काले बादल जैसे आंखों का काजल इंद्रधनुषी थी तेरे गालों की लाली , जब मिलती अनजाने में नजरें तो उसका वो मुस्कुराना , छम से बजती है कहीं पायल और उसकी यादों का आ जाना ।

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